शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010
दूध वाले भैया
शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010
प्रगति मैदान, नई दिल्ली की यात्रा
दोस्तो,
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला,2010 दिनांक 30 जनवरी, 2010 से जारी है और 7 फरवरी, 2010 तक चलेगा। अनेक बोलियों, भाषाओं और लिपियों के जानकार इस मेले में आ-जा चुके होंगे और आगे भी आयेंगे। प्रगति मैदान के एक हॉल के बाहर जब से यह बोर्ड लटकाया गया है तब से अब तक हिन्दी-साहित्य के अमिताभ बच्चन कहे जाने वाले…से लेकर विदूषक कहे जाने वाले…नहीं, यहाँ मैं किसी का नामोल्लेख नहीं करूँगा, बस यह कहूँगा कि हर वर्ष हिन्दी-पखवाड़ा और हिन्दी-सप्ताह मनाने के नाम पर लाखों रुपए लुटा डालने वालों से लेकर लूट ले जाने वालों तक, हर स्तर का विद्वान यहाँ से अवश्य ही गुजरा होगा। मैं आपसे सिर्फ यह जानना चाहता हूँ फोटो में दर्शाया गया यह शब्द किस भाषा का है? इसी क्रम में कुछ-और फोटो भी मैं आगे प्रकाशित करने की अनुमति आपसे चाहूँगा।
--बलराम अग्रवाल
मंगलवार, 1 दिसंबर 2009
केरल यात्रा-6
बुधवार, 25 नवंबर 2009
केरल यात्रा-5
आदमी का हर अनुभव उसकी गलती की कोख से जन्म लेता है। जितनी ज्यादा गलतियाँ, उतने ज्यादा अनुभव। इस सम्बन्ध में एक मुख्य बात यह अवश्य याद रखें कि— गलतियाँ की नहीं जातीं, हो जाती हैं और मूर्ख वह नहीं जो गलतियाँ करता है; बल्कि मूर्ख वह है जो एक ही प्रकार की गलती को बार-बार दोहराता है।
बुधवार, 18 नवंबर 2009
केरल यात्रा-4
रोमन से अनुवाद के सम्बन्ध में मेरा एक छोटा-सा उदाहरण यह अनुभव भी प्रस्तुत कर देना विषय से अलग नहीं माना जाना चाहिए—2005 की बात है। कर्नाटक एक्सप्रेस के द्वितीय श्रेणी स्लीपर में बैठा मैं बंगलौर से दिल्ली की यात्रा पर था। मेरी बर्थ के आसपास ही एक नौजवान की भी बर्थ थी। वह बंगलौर स्थित किसी बहुराष्ट्रीय कम्पनी में इटेलियन से हिन्दी या अंग्रेजी भाषा में अथवा हिन्दी या अंग्रेजी से इटेलियन भाषा में अनुवादक के पद पर कार्यरत था। उसने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से इटेलियन में स्नातक की उपाधि ली थी और इटली से स्कॉलरशिप भी उसे मिली थी। उससे मुझे पता चला कि इटेलियन में ‘च’ वर्ण नहीं है और न ही ‘च’ उच्चारण है।
