शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

फाँसीघर—सेलुलर जेल, पोर्टब्लेयर

अपना दौर के इस अंक में प्रस्तुत है, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के पोर्टब्लेयर स्थित सेलुलर जेल का ऐतिहासिक फाँसीघर।

सेलुलर जेल, पोर्ट ब्लेयर के प्रांगण में स्थित इस फाँसीघर का फर्श लकड़ी के तख्तों से दरवाजानुमा बना है जो बायीं ओर दिखने वाले लोहे के लीवर को खींचने पर नीचे को खुल जाता था। इस पर बनी सफेद रंग़ की गोल आकृति पर खड़ा करके, ऊपरी बीम में बँधे फंदों को मृत्युदण्ड प्राप्त देशभक्तों की गरदन में फँसाया जाता था। तत्पश्चात लीवर को खींच दिया जाता था और देशभक्त का शरीर नीचे झूल जाता था।

कितने देशभक्तों ने इन्हें चूमा, उनका सही-सही आँकड़ा हमेशा ही संदिग्ध रहेगा। उन सभी महान आत्माओं को असीम श्रद्धा के साथ नमन।



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6 टिप्‍पणियां:

Jandunia ने कहा…

शानदार पोस्ट

उमेश महादोषी ने कहा…

पोर्टब्लयेर कभी जाना तो नहीं हुआ। पर कुछ क्षणों के लिए आपने हमें वहन ले जाकर जरूर खड़ा कर दिया। बहुत अच्छा लगा।

सुरेश यादव ने कहा…

भाई बलराम अग्रवाल जी ,आप ने जिस तीर्थ स्थल के दर्शन कराये हैं.वह प्रत्येक देश भक्त के लिए पुण्यकारी है.बार बार 'देशभक्त 'शब्द का इस्तेमाल कर सच्ची श्रद्धांजलि दी है .मैं इस भावना पर गर्व का सकता हूँ.बधाई.

pran ने कहा…

Jaankaaree dene ke liye aapkaa
dhanyawaad.

Devi Nangrani ने कहा…

Adbhut jaakari tasveeron sahit..thanks a lot

भारतेंदु मिश्र ने कहा…

सुन्दर यात्रा और विस्तृत जानकारी के लिए आभार।