गुरुवार, 28 जून 2012

चुपचाप चले गए अमर गोस्वामी/बलराम अग्रवाल

दोस्तो,
कथाकार अमर गोस्वामी
साहित्य की दुनिया में अमर गोस्वामी न तो अनजाना नाम है और न ही नजरअन्दाज़ कर देने वाला। फिर भी, हैरान हूँ कि अभी तक किसी सूचना-तंत्र पर उनके चले जाने का समाचार दिखाई-सुनाई नहीं पड़ा। दिनांक 26 जून 2012 को दोपहर 11-30 के लगभग अजय जी (मेधा बुक्स) का फोन आया था। उन्हें उमेश जी ने और उमेश जी को डॉ॰ शेरजंग गर्ग के माध्यम से अमर गोस्वामी का निधन हो जाने और दोपहर 12 बजे के लगभग गाजियाबाद में हिंडन-नदी के तटवर्ती श्मशान में अंतिम संस्कार किए जाने का समाचार मिला था। उस दिन संयोग से 12 बजे से 2 बजे तक के लिए मैं अत्यन्त व्यस्त था इसलिए पहुँच नहीं सकता था; लेकिन उमेश जी व अजय जी ने वह दायित्व निभाया।
उसी दिन शाम को घर लौटने पर मैंने रूपसिंह चंदेल, भारतेन्दु मिश्र, सुभाष नीरव आदि को फोन पर सूचित किया तो वे भी चौंके। गरज यह कि शाम तक भी किसी तक उनके निधन की सूचना नहीं पहुँची था। कल रात अजय जी से पुन: बात हुई। अमर गोस्वामी के बारे में उन्हें जब सूचना-तन्त्र की इस विफलता के बारे में बताया तो उन्होंने सुझाव दिया कि मैं यह समाचार फेस बुक पर दे दूँ। इस हेतु तलाश हुई उनके संक्षिप्त परिचय और फोटो की। तो संक्षिप्त परिचय तो रे माधव की वेव साइट पर उपलब्ध हो गया लेकिन इन्टरनेट पर अमर गोस्वामी का चित्र तलाश करने की जद्दोजहद में अमर सिंह, अमर कुमार, फलाँ-फलाँ गोस्वामी आदि पता नहीं किस-किस के अनेक मुद्राओं में फोटो मिलते रहे, अमर गोस्वामी का एक भी नहीं मिला।  हिन्दी बुक सेन्टर आदि पुस्तक-विक्रेताओं की वेब साइट्स पर भी अमर गोस्वामी की पुस्तकों के विक्रय हेतु टाइटिल तो खूब नजर आए, उनके निधन सम्बन्धी कोई सूचना या उनका फोटो एक भी नजर नहीं आया। जाहिर है कि अमर गोस्वामी फोटो खिंचवाने की लालसा से दूर के व्यक्ति थे।
वे काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। मालूम चला कि गत दिनों वे नोएडा से गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में शिफ्ट कर गए थे।  मैं रेमाधव की वेब साइट से उनका संक्षिप्त परिचय यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ। फोटो काफी जद्दोजहद के बाद उमेश जी (आलेख प्रकाशन) के खजाने से मिली है।
निधन वाला अंतिम कॉलम दुर्भाग्यवश मुझे जोड़ना पड़ा है।
आइए, उस श्रमशील व्यक्ति की आत्मा को शान्ति और परिजनों को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना परमपिता से करें।
अमर गोस्वामी
जन्म : 28 नवम्बर 1945 को मुलतान के एक बांग्लाभाषी परिवार में। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर करने के बाद बुढ़ार (शहडोल, म.प्र.) और भरवारी के (इलाहाबाद उ.प्र.) दो महाविद्यालयों में अध्यापन, फिर लम्बे समय से पत्रकारिता में।
सम्प्रति : गाजियाबाद (उ.प्र.) स्थित रेमाधव पब्लिकेशन्स' के मुख्य संपादक के पद पर कार्यरत।
कार्य-अनुभव : कथा-पत्रिकाकथान्तर', बाल पत्रिका सपा और कांग्रेस पार्टी द्वारा संचालित भारती फीचर्स' का संपादन। विकल्प' (सं. शैलेश मटियानी), आगामीकल (सं. नरेश मेहता), ‘मनोरमा' (सं. अमरकान्त), ‘गंगा' (सं. कमलेश्वर) सण्डे आबजर्वर' (सं. उदयन शर्मा), ‘अक्षर भारत' और नया ज्ञानोदय' (सं. प्रभाकर श्रोत्रिय) आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में वरिष्ठ पदों पर संपादन सहयोग।
प्रकाशित कृतियां : हिमायती', ‘महुए का पेड़', ‘अरण्य में हम', ‘उदास राधोदास', ‘बूजो बहादुर', ‘धरतीपुत्र', ‘महाबली', ‘इक्कीस कहानियां', ‘अपनी-अपनी दुनिया', ‘कल का भरोसा' तथा भूलभुलैया' (सभी कहानी-संग्रह)इस दौर में हमसफर' उपन्यास किताबघर, नयी दिल्ली से प्रकाशित। बच्चों की कहानियों की 16 पुस्तकें तथा एक बाल उपन्यास शाबाश मुन्नूप्रकाशित। बांग्ला से हिन्दी में साठ से ज्यादा अनूदित पुस्तकें प्रकाशित। 
पुरस्कार-संपादन : केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा हिमायती' कहानी-संग्रह पर अहिन्दी भाषी हिन्दी लेखक पुरस्कार, 1988, दिल्ली हिन्दी साहित्य सम्मेलन, सनेही मण्डल नोएडा द्वारा नोएडा रत्नसे सम्मानित, 1996 इण्डो रशियन लिटरेरी क्लब, नयी दिल्ली द्वारा बाल लेखन के लिए सम्मानित, 1999 हिन्दी एकेडेमी, दिल्ली द्वारा बाल उपन्यास शाबाश मुन्नू' पुरस्कृत, 2005, उ.प्र. हिन्दी संस्थान लखनऊ द्वारा इस दौर में हम सफर' उपन्यास पर प्रेमचन्द पुरस्कार, 2005
निधन : 26 जून, 2012, गाजियाबाद में हिंडन नदी के तटवर्ती श्मशान में उसी दिन पंचतत्त्व में विलीन।

3 टिप्‍पणियां:

राजेश उत्‍साही ने कहा…

अमर गोस्‍वामी जी से मैं पहली बार लखनऊ में मिला था। नालंदा संस्‍था द्वारा आयोजित बच्‍चों के लिए साहित्‍य लिखने की एक कार्यशाला में मैं रिसोर्स परसन था और वे भागीदार। एक ही बैठक में लिखी गईं उनकी दो चित्रकथा किताबें हमने चुनी थीं और वे प्रकाशित भी हुई थीं। दूसरी मुलाकात उनसे भोपाल में आयोजित एक कार्यशाला में हुई थी। मेरे हिसाब से बहुत सुलझे हुए रचनाकार थे। विनम्र श्रदांजलि।

DrZakir Ali Rajnish ने कहा…

अमर जी को हार्दिक श्रद्धांजलि।

पूर्णिमा वर्मन ने कहा…

भावभीनी श्रद्धांजलि